Meeting and parting in life which teaches us so much
यूँ ही चलते चलते
आसान तो नही था भुलाना तुमको
और न ही याद रखना था तुमको
कही यूँ ही हम खो से गए थे
या रास्ते अजनबी से हो गए थे
जिंदगी के मसलों ने उलझा दिया था
पलकों के कोरों को नम सा किया था
फिर भी अंजुरी में सपने चुने थे
चलते चलते हम यूँ ही कहीं मिले थे
कहीं कोई दीवार या बंधन नहीं थे
शिकवा शिकायत के मौके भी कहाँ थे
कुछ रिश्ते मिलकर भी खो गए थे
कुछ खोकर भी यूँ मिल गए थे
तुमने और हमने सब जाना हुआ था
मगर उन दो लम्हों में क्या हो गया था
भरे घर में हम यूँ अकेले तो न थे
फिर क्यों कुछ बिन कहे सुन लिया था
न हमने कहा था न तुमने सुना था
पर फिर भी बहुत कुछ आंखों ने पढ़ा था
बस उन लम्हों ने सब तय किया था
उस दिन से हमको कितना गिला है
क्या तुमको पता है क्या तुम सुनोगे
सुन कर भी क्या तुम करोगे
जब की यह सब हमारे लिए था
उस पल से हमने कैसे जिया था
कुछ दिन के लिए सब खो गया था
फिर लौट कर अपने राह में हम खड़े थे
अक्सर पुराने मंजर दिख गए थे
पर क्या जो हुआ था उसमे सिर्फ़ हम थे
सुना था तुमने यही तो कहा था
नहीं ये होता तो ही भला था
कोई शिकायत हमने न की थी
तब उस पल को सोच ही लिया था
भूलना तुम्हे यूँ ही सही है
सहज तो न हम है और न तुम हो
राह पर यहीं है हमे फिर यकीन है
हमने तुम्हे पाया ही कहा था
तो खोने का डर तो कभी भी नहीं था
अब तो इस डगर चलते चलते
अपनी ही दुनिया में सुकून पा लिया है
जाओ तुम्हे हमने अब भूला दिया है
जाओ तुम्हे हमने अब भूला दिया है
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