Kuch Hamara Bhi...

May 16 2008  | Views 417 |  Comments  (28)
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When Love becomes Devotion


कुछ
हमारा भी

 
 
 


चाँदी के धागे लेकर

 

रातों के तारें लेकर

ओस के मोती लेकर

इक माला पिरोनी है


 

 

थोडी सी हँसी लेकर

 

पलकों की नमी लेकर

 

कली की हया लेकर

 

इक चुनरी सजानी है


 

बारिश की रिम झिम लेकर

शहनाई के सुर लेकर

 

बंसी की धुन लेकर

 

इक सरगम सुनानी है


 

 

सूरज की आंख लेकर

 

चन्दा के पंख लेकर

 

किरणों को संग लेकर

 

इक दिया सजाना है


 

 

हलकी सी उदासी लेकर

 

छलके से आंसू लेकर

 

खोये से सपने लेकर

 

इक चुभन छुपानी है



 

 

राधा की जिद लेकर

 

मीरा की टीस लेकर

 

अपनी प्रीत लेकर

 

इक ज़िंदगी जीनी है

 

 

 

 

 

 



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